भारत के धार्मिक इतिहास के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
(1) बोधिसत्व, बौद्धमत के हीनयान सम्प्रदाय की केन्द्रीय संकल्पना है।
(2) बोधिसत्व अपने प्रबोध के मार्ग पर बढ़ता हुआ व्यक्ति है।
(3) बोधिसत्व समस्त सचेतन प्राणियों को उनके प्रबोध के मार्ग पर चलने में सहायता करने के लिए स्वयं की निर्वाण प्राप्ति विलम्बित करता है।
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A. केवल 1
B. 2 और 3
C. केवल 2
D. 1, 2 और 3
Solution & Explanation
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