पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त के अनुसार, आत्मसात्करण (समाविष्टीकरण) से तात्पर्य है-
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A. पूर्ववर्ती विद्यमान बौद्धिक संरचनाओं तथा वातावरणीय माँग का मिलान
B. चिन्तन के नये तरीकों का समायोजन करना तथा पूर्ववर्ती बौद्धिक संरचनाओं में सुधार करते हुए व्यवहार करना
C. पूर्व ज्ञान तथा नवीन ज्ञान के बीच साम्यावस्था होना
D. प्रत्यक्षात्मक व संज्ञानात्मक सूचनाओं को सार्थक पैटर्न में व्यवस्थित करना