इनमें से हास्य रस का उदाहरण कौन-सा है?
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A. सदा रहत पावस ऋतु हम पै जब ते स्याम सिधारे।
B. वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बड़े चलो। सामने पहाड़ हो कि सिंह की दहाड़ हो। तुम कभी रुको नहीं, तुम कभी झुको नहीं।
C. तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेम प्रताप, साज मिले पन्द्रह मिनट, घंटा भर आलाप। घंटा भर आलाप, राग में मारा गोता, धीरे-धीरे खिसक चुके थे सारे श्रोता।
D. सोक बिकल सब रोवहि रानी। रूप सीलु बलु तेजु बखानी। करहि बिलाप अनेक प्रकारा। परिहि भूमि तल बारिहि बारा।